हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (HPBOSE) की 12वीं कक्षा की परीक्षा हर साल लाखों छात्रों के भविष्य का फैसला करती है। 2025 में इस परीक्षा में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली थी, जहां टॉप करने के लिए छात्रों ने दिन-रात मेहनत की। पिछले साल की टॉपर महक ने 97.2% अंक हासिल कर पूरे राज्य में अपना नाम रोशन किया था। यह प्रतिशत बताता है कि बोर्ड परीक्षाओं में टॉप-3 में आने के लिए 96% से ऊपर के अंक जरूरी हो गए हैं। दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे छात्रों ने भी क्रमशः 96.8% और 96.4% जैसे शानदार प्रतिशत बनाए थे, जो इस प्रतियोगिता की कठिनाई को दर्शाता है।
इससे पहले 2024 में भी टॉपर्स का प्रतिशत 95% के आसपास रहा था, लेकिन हर साल यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इसका मतलब है कि छात्रों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और उन्हें हर विषय में लगभग पूर्ण अंक लाने की जरूरत है।
🔥 आम छात्रों पर इसका सीधा असर यह पड़ता है कि अब सिर्फ पास होना काफी नहीं है। अच्छे कॉलेजों में एडमिशन के लिए कम से कम 85-90% अंक जरूरी हो गए हैं। मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे प्रतिष्ठित कोर्सेज में तो 95% से कम पर सीट मिलना मुश्किल है। यह ट्रेंड छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
💡 मेरी राय में, यह बढ़ता प्रतिशत सिर्फ मेहनत की कहानी नहीं है, बल्कि बेहतर कोचिंग, ऑनलाइन संसाधनों और स्मार्ट तैयारी का परिणाम भी है। आज के छात्र पुराने तरीकों के साथ-साथ यूट्यूब, एजुकेशन ऐप्स और मॉक टेस्ट्स का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इसका मानसिक दबाव भी बढ़ा है। अगर कोई छात्र 90% भी ला रहा है, तो उसे लगता है कि वह पीछे रह गया।
उदाहरण के लिए, शिमला के एक सरकारी स्कूल के छात्र ने बताया कि उसने 92% अंक लाने के बावजूद अपनी पसंद के कॉलेज में एडमिशन नहीं पा सका क्योंकि कट-ऑफ 94% थी। यह असली तस्वीर है आज की शिक्षा प्रणाली की।
निष्कर्ष यह है कि HPBOSE की 12वीं परीक्षा में अब हर नंबर मायने रखता है। छात्रों को सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि स्मार्ट तैयारी, समय प्रबंधन और परीक्षा पैटर्न की गहरी समझ की जरूरत है। 2026 के परिणाम में भी यही ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है।